poems & articles
Saturday, 6 September 2025
चारोळी ( झुला)
- झुला
झुल्यावर झुलते ललना हसरी
तरंगतो हवेवर मुक्त केस संभार
अलंकार शोभती वसनावरती
उजळून निघाले हे नील अंबर
रचना
श्रीमती माणिक कल्लाप्पा नागावे
कुरुंदवाड जिल्हा कोल्हापूर
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